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मेरी स्मृति !

Posted On: 22 Mar, 2010 में

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भुला    दो         तुम !
उसको         जिसने ,
कष्ट  दिए        और ;
आंसूं भी दिए जिसने .
भुला दो ! उसको जो;
करता   है   झूठे  वादे ,
कहता है दूंगा    साथ ;
करता    नहीं    इरादे.
दिलाओ न याद उसको;
जिसकी   मीठी     बोली,
अब       लगती          है ;
मुझको    बस ठिठोली .
याद     ना     दिलाना ;
उस   निर्मोही को
मुझे,
जलने की सजा हरपल;
दे    गया      जो    मुझे .
ना   सोचूं  कभी    मैं ;
कैसे बिताये थे वे पल,
मेरे  चेहरे    का साया,
बना था उसका आँचल.
ना आँखों    में  आये;
फिर     वो   तस्वीर,
जो लगती     थी  तब;
मुझको मेरी तकदीर.
भुला दो   मेरे   इस;
नादाँ     मन        से,
वे बातें जो कही थी ,
उसने    नयन     से.
भुला            दो    उन ;
सुनहरी हथेलियों को,
उन            अनसुलझी ,
अनबुझी पहेलियों को.
मैं चाहता हूँ भूल जाना ;
उसके सांसो की गर्मी,
गुलाबों      से    सुन्दर ,
होटों    की         नरमी.
स्मृति ! भुला दो वो ;
अजंता       की  मूरत ;
पत्थर का दिल और,
प्यारी     सी      सूरत.

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

dineshaastik के द्वारा
January 6, 2012

सुन्दर कविता, आक्रोश एवं पीड़ा से ओत-पोत। बधाई……….

Manoj के द्वारा
March 22, 2010

कविता के साथ आपकी शुरुआत बहुत बढिया रही .


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